Most Important SEO Interview Questions and answers for 3 years experience In Hindi

SEO Interview Questions and answers for 3 years experience अगर आप कुछ समय से SEO में काम कर रहे हैं और नौकरी बदलने के बारे में सोच रहे हैं, तो हो सकता है कि आपको इंटरव्यू देना पड़े जिसमें कुछ खास सवाल पूछे जाएं। मैंने यहाँ जो सवाल बताए हैं, वे अक्सर इंटरव्यू में पूछे जाते हैं; उनकी अच्छी तरह से तैयारी करना आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।

SEO Interview Questions and answers for 3 years experience

Question:1 टेक्निकल से क्या होता हैं अगर किसी वेबसाइट पर टेक्निकल सेओ से रिलेटेड प्रॉब्लम आ रही हैं तो उसको कैसे ठीक करेंगे?

Question:2 बाउंस रेट क्या होता हैं ये ज्यादा होगा तो अच्छा हैं एक वेबसाइट के लिए या फिर ये काम होगा तो अच्छा हैं एक वेबसाइट के लिए?

Question:3 एक वेबसाइट को मोबाइल फ्रेंडली बनाने के लिए क्या करना चाहिए?

Question:4 एक वेबसाइट की स्पीड को अच्छा करने के लिए क्या करना होता हैं वेबसाइट पर ?

Question:5 गूगल की एक अल्गोरिथम हैं पांडा अल्गोरिथम ये क्या काम करती हैं?

Question:6 Google sanbox क्या हैं?

Question:7 Google search console क्या हैं?

Question:8 SEO में मदद करने वाले किसी WordPress प्लगइन का नाम बताएं और बताएं कि क्या वह ऐसी जानकारी देता है जिससे SEO आसान हो जाता है।?

Question:9 अगर हम आपको नौकरी पर रखते भी हैं, तो हम आपको एक प्रोजेक्ट देंगे और एक समय-सीमा तय करेंगे—जिसमें यह बताया जाएगा कि कंपनी एक निश्चित समय तक क्या नतीजे चाहती है। अगर आप उस समय-सीमा के अंदर वे नतीजे नहीं दे पाते, तो इसके लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा?

Question:10 गूगल में रैंक करने के लिए कोई 2 से 3 रैंकिंग फैक्टर्स बताओ?

Answers
Answer:1 टेक्निकल SEO एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वेबसाइट की टेक्निकल हेल्थ की जांच की जाती है ताकि यह पक्का किया जा सके कि सर्च इंजन उसे आसानी से खोज सकें, क्रॉल कर सकें और इंडेक्स कर सकें। अगर कोई टेक्निकल समस्या आती है, तो वेबसाइट का ऑडिट करके उस खास समस्या जैसे कि टूटे हुए लिंक, धीमी लोडिंग स्पीड या इंडेक्सिंग में गड़बड़ी का पता लगाना ज़रूरी होता है। समस्या का पता चलने के बाद, अगला कदम उसे ठीक करना होता है।
Answer:2 बाउंस रेट एक रेट होता है जो हर वेबसाइट को दिया जाता है। अब यह रेट कैसे दिया जाता है। यह रेट तब दिया जाता है जब कोई विजिटर वेबसाइट पर जाता है और अगर विजिटर वेबसाइट पर गया और जाते ही विजिटर वेबसाइट से बाहर आ गया तो ऐसी स्थिति में उस वेबसाइट का जो बाउंस Rate होगा, वह ज्यादा होगा और दूसरी तरफ अगर कोई विजिटर वेबसाइट पर जाता है

और वेबसाइट पर जाने के बाद टाइम बीतता है। कंटेंट को पड़ता है। वेबसाइट को देखा है तो ऐसी स्थिति में वेबसाइट का जो बाउंस रेट है, वह कम रहता है। अब जो बाउंसरेट है, वह कम रहता है। ये एक अच्छी बात होती है। अगर किसी वेबसाइट का बाउंस रेट ज्यादा है तो वह अच्छा नहीं माना जाता है।
Answer:3 अगर एक वेबसाइट को मोबाइल फ्रेंडली बनाना है तो ऐसी स्थिति में वेबसाइट के ऊपर मोबाइल फ्रेंडली थीम का इस्तेमाल करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। अगर आप मोबाइल फ्रेंडली थीम का इस्तेमाल करोगे तो बहुत ज्यादा चांसेस है कि वह वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली होगी और इसमें और क्या कर सकते हो। जब भी इमेज लगाओ तो वह इमेज ऐसी होनी चाहिए जो मोबाइल के अंदर अच्छे से दिखे तो इस बात का ध्यान रखें।

जब भी वेबसाइट के अंदर इमेज अपलोड करें तो उस इमेज को मोबाइल के हिसाब से अपलोड करना है। वहीं दूसरी तरफ इसमें एक काम और किया जाता है। कोई भी ऐसा कोड अपनी वेबसाइट में ऐड नहीं करना है जो मोबाइल को सपोर्ट नहीं करता हो। आप जब भी अगर कोई अपनी वेबसाइट में कोड ऐड कर रहे हो तो यह ध्यान रखो कि वह कोड मोबाइल के हिसाब से ही हो।
Answer:4 अगर किसी वेबसाइट की स्पीड को फास्ट करना है तो उसके लिए कुछ काम है जो कर सकते हैं जब हम वेबसाइट के ऊपर इमेज अपलोड करते हैं तो उन इमेज का जो साइज है, वह कम करके अपलोड करना है। उन इमेज को कंप्रेस करके अपलोड करना है और इसमें और क्या कर सकते हैं। अगर वेबसाइट के ऊपर ज्यादा प्लगिंस है तो उन प्लगिंस की संख्या को कम करना है। मतलब उन प्लगिंस को हटाना है जिन प्लगिंस का कोई इस्तेमाल नहीं है वेबसाइट के ऊपर क्योंकि जितने ज्यादा प्लगिंस होंगे, इससे भी वेबसाइट हवी हो जाती है

और क्या कर सकते हैं और इसमें एक काम और कर सकते हैं। अगर आप अपनी वेबसाइट पर कोई Code लगते हो तो ऐसे कोड लगाने से भी वेबसाइट की जो स्पीड है, वह कम हो जाती है तो जब भी कोई कोड लगाओगे अपनी वेबसाइट पर तो इस बात का ध्यान रखो या तो कोड मत लगाओ। अगर कोड लगा भी रहे हो तो वह हल्का कोड होना चाहिए, जिससे वेबसाइट की स्पीड को फर्क ना पड़े।
Answer:5 गूगल के पांडा एल्गोरिदम का मुख्य काम उन वेबसाइट्स की रैंकिंग कम करना है जिनमें कम-क्वालिटी वाला, बेकार या कॉपी किया हुआ कंटेंट होता है, जबकि अच्छी क्वालिटी या ओरिजिनल कंटेंट वाली वेबसाइट्स को बेहतर रैंकिंग देना है।
Answer:6 गूगल सैंडबॉक्स एक ऐसा बॉक्स होता है जिसके अंदर वह वेबसाइट होती है जो नई वैबसाईटीस आती है। गूगल उन सभी वेबसाइट को इस सेंड बॉक्स में रखता है और इस सेंड बॉक्स में गूगल क्यों रखता है, New वेबसाइट को गूगल यह देखा है की वेबसाइट क्या है। क्या काम कर रही है, कैसा काम कर रही है। कितने डेडीकेशन से काम कर रही है और कम से कम गूगल सेंड बॉक्स के अंदर नई वेबसाइट को 4 से 6 महीने रखता ही है।

जब गूगल को लगता है की वेबसाइट सही है, सही से काम कर रही है। अच्छा काम कर रही है। सही कंटेंट दे रही है। तब जाकर गूगल उसे सेंड बॉक्स से वेबसाइट को बाहर करता है। लेकिन तब तक गूगल सेंड बॉक्स से वेबसाइट को बाहर नहीं करेगा। जब तक गूगल को पूरा भरोसा नहीं हो जाता की वेबसाइट अच्छी है। काम करने के लिए ही आई है।
Answer:7 Google Search Console, Google का एक टूल है जो आपकी वेबसाइट के बारे में बहुत सारी जानकारी देता है। इस टूल की मदद से आप कई तरह की जानकारी ट्रैक कर सकते हैं, जैसे कि कौन सा कंटेंट रैंक कर रहा है, कितने इंप्रेशन और क्लिक मिले हैं, और आपके कंटेंट का स्टेटस क्या है—खासकर यह कि कौन से पेज इंडेक्स हो गए हैं और कौन से नहीं।
Answer:8 इस प्लगइन का नाम Rank Math SEO है; यह WordPress के लिए एक बेहतरीन प्लगइन है। यह यूज़र्स को कई तरह की जानकारी देता है, जैसे कि कंटेंट में फ़ोकस कीवर्ड कितनी बार इस्तेमाल हुआ है, टाइटल सही है या नहीं, डिस्क्रिप्शन दिया गया है या नहीं, और इंटरनल लिंकिंग की गई है या नहीं।
Answer:9 अगर Timeline और Resources वास्तविक (Realistic) थे, तो उसकी ज़िम्मेदारी मेरी होगी। मैं पहले ही संभावित Risks की जानकारी दूंगा, नियमित Progress साझा करूंगा और समय रहते किसी भी Issue को Escalate करूंगा। अगर किसी कारण से Target पूरा नहीं हो पाता, तो मैं उसकी वजह का Analysis करके सुधार की योजना प्रस्तुत करूंगा और Result हासिल करने की पूरी कोशिश करूंगा।
Answer:10 अगर किसी वेबसाइट को गूगल के अंदर अच्छी पोजीशन पर रैंक करना है तो ऐसी स्थिति में कुछ काम है जो वेबसाइट पर होने चाहिए। अगर वेबसाइट के ऊपर एक अच्छी क्वालिटी का कंटेंट लिखा है। एक ऐसा कंटेंट लिखा है जिसको पढ़ने के बाद किसी व्यक्ति का प्रॉब्लम सही होता है।

प्रॉब्लम सॉल्व होता है तो ऐसी स्थिति में उस वेबसाइट को रैंकिंग मिल सकती है और दूसरा जो है अगर किसी वेबसाइट की अथॉरिटी ज्यादा है तो भी ऐसी स्थिति में उस वेबसाइट को रैंकिंग मिलती है। लेकिन इनमें से अगर कुछ भी नहीं है। मतलब वेबसाइट पर अच्छा कंटेंट भी नहीं है। वेबसाइट की अथॉरिटी भी अच्छी नहीं है तो ऐसी स्थिति में उस वेबसाइट को रैंकिंग मिलने के चांसेस बहुत ही कम होते हैं।

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