23 Most Important Google Ranking factors In Hindi

आज के इस आर्टिकल में मैं आपको बताऊंगा कि Google Ranking Factors क्या हैं और ये कैसे काम करते हैं। अगर आप भी अपनी वेबसाइट को Google पर रैंक कराना चाहते हैं, तो आपको Google Ranking Factors के बारे में पता होना चाहिए और इस बारे में मैं आपको डिटेल में बताऊंगा कि Google Ranking Factors क्या हैं।

आजकल बहुत से लोग वेबसाइट बनाते हैं और अपनी वेबसाइट पर काम भी करते हैं। कुछ लोगों की वेबसाइट रैंक हो जाती है लेकिन बहुत से ऐसे लोग हैं जिनकी वेबसाइट रैंक नहीं होती। जिन लोगों की वेबसाइट रैंक नहीं होती, उन्हें शायद Google Ranking Factors के बारे में पता नहीं होता और इस वजह से उनकी वेबसाइट को अच्छी रैंकिंग नहीं मिलती। तो,आज हम Google Ranking Factors के बारे में डिटेल में जानेंगे और आपको वे तरीके बताएंगे जिनसे आपकी वेबसाइट रैंक होगी।

Google Ranking factors क्या होते हैं

Google Ranking Factors कुछ ऐसे फैक्टर्स हैं जो आपकी वेबसाइट को Google में रैंक करवाने में आपकी मदद करते हैं। Google Ranking Factors में कई चीज़ें देखी जाती हैं जैसे आपका कंटेंट कैसा है, आप किन कीवर्ड्स पर काम कर रहे हैं, आपकी वेबसाइट कैसी है, आपकी वेबसाइट का लुक कैसा है, आपकी वेबसाइट की स्पीड कैसी है, ये सब इसमें देखा जाता है और

भी बहुत सी चीज़ें इसमें देखी जाती हैं और आपको अपनी वेबसाइट पर वो सभी चीज़ें सही रखनी होती हैं, अगर आप सभी चीज़ें सही रखेंगे तभी आपकी वेबसाइट Google Ranking Factors के अंदर आएगी और आपकी वेबसाइट को Google में रैंकिंग मिलेगी।

Google Ranking factors

अब मैं आपको बहुत ज़रूरी Google Ranking Factors के बारे में बताने जा रहा हूँ। अगर आप भी अपनी वेबसाइट को Google में अच्छी जगह पर रैंक कराना चाहते हैं, तो आपको ये Google Ranking Factors पता होने चाहिए।

High Quality Content

Google Ranking factors में से यह सबसे इंर्पोटेंट फैक्टर में माना जाता है। हाई क्वालिटी कंटेंट अगर आपकी वेबसाइट के ऊपर हाई क्वालिटी कंटेंट है तो इससे आपकी वेबसाइट को बहुत ही ज्यादा फायदा होता है। अगर आपकी वेबसाइट के ऊपर हाई क्वालिटी कंटेंट है तो उसके रैंकिंग होने के चांसेस बहुत ज्यादा होते हैं क्योंकि गूगल ऐसे कंटेंट को रैंक करता है। जिस कंटेंट की क्वालिटी अच्छी होती है जो Content किसी यूज़र की प्रॉब्लम को सॉल्व करता है।

content writing

हाई क्वालिटी कंटेंट का मतलब यह होता है कि आपको एक यूनीक कंटेंट लिखना होता है। दूसरे लोगों से अलग कंटेंट लिखना होता है और हाई क्वालिटी कंटेंट के अंदर आपको यूजर की प्रॉब्लम को सॉल्व करना होता है और इसके साथ-साथ ही हाई क्वालिटी कंटेंट में आसान शब्द का आसान सेंटेंस का इस्तेमाल करना होता है ताकि किसी भी व्यक्ति को पढ़ने में आसानी हो।

अगर किसी यूज़र को आपका कंटेंट पढ़ने में दिक्कत हो रही है, तो वह यूज़र आपकी वेबसाइट जल्दी छोड़ देता है और गूगल यह सब नोट कर लेता है कि यूज़र किस वेबसाइट पर कितनी देर रुक रहा है।फिर इसके हिसाब से ही आपके कंटेंट की रैंकिंग ऊपर या फिर निचे होती हैं.

Keyword Optimization

जब आप अपना आर्टिकल लिखते हो तो आपको अपने आर्टिकल के अंदर अपना फोकस कीवर्ड भी रखना होता है। मतलब एक ऐसा कीवर्ड रखना होता है जिस कीवर्ड के ऊपर आपको उस आर्टिकल को रैंक करना है। तो इसके लिए आपको अपना फोकस कीवर्ड अपने टाइटल में रखना होता है। कंटेंट के अपने डिस्क्रिप्शन में रखना होता है कंटेंट के और जो आप कंटेंट लिख रहे हो उसके जो

Starting के 100 वर्ड्स है, उसमें भी आपको अपना फोकस कीवर्ड रखना होता है। अगर आप इन जगहों पर अपना फोकस कीवर्ड रखते हो तो Google को यह समझ में आता है कि यह आपका फॉक्स कीवर्ड है और इस कीवर्ड के ऊपर इस आर्टिकल को रैंक करना है।

कंटेंट में फोकस कीवर्ड को इस्तेमाल करने की एक लिमिट होती है। आपको उस लिमिट के अंदर ही उस फॉक्स कीवर्ड को इस्तेमाल करना है। लिमिट से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करनी है। अगर आपने लिमिट Cross कर दी तो यह SEO के लिए अच्छा नहीं माना जाता है।

Google Ranking Factors में यह भी एक इंपॉर्टेंट फेक्टर में से एक है। अगर आपकी वेबसाइट के ऊपर हाई क्वालिटी के बैकलिंक है। अगर आपकी वेबसाइट को हाई अथॉरिटी वेबसाइट से बैकलिंक मिले हुए हैं तो इससे गूगल के अंदर आपकी वेबसाइट के लिए एक ट्रस्ट बनता है। गूगल आपकी वेबसाइट पर भरोसा करने लग जाता है। आपको क्या करना है। आपको नेचुरल तरीके से बैकलिंक बनाने हैं। अपनी वेबसाइट के ऊपर नेचुरल तरीके से बैकलिंक बनाने हैं। ज्यादा से ज्यादा तो इससे आपकी रैंकिंग अच्छी होती है गूगल के अंदर

Website Loading Speed

यह जो रैंकिंग फैक्टर है, यह एक डायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर है अगर आपकी वेबसाइट की स्पीड कम है तो इससे क्या होता है कि कोई भी यूजर आपकी वेबसाइट पर आएगा तो वह जल्दी से आपकी वेबसाइट से चला जाएगा। आपके कंटेंट को पड़ेगा भी नहीं, बिना पढ़े ही चला जायेगा क्योंकि आपकी वेबसाइट ही नहीं ओपन हो रही है तो ऐसी स्थिति में यह चीज गूगल समझ लेता है और Google ऐसी वेबसाइट को रैंक ज्यादा नहीं करता है। जिस वेबसाइट की स्पीड बहुत ही कम होती हैं।

Google हमेशा ऐसी वेबसाइट को अच्छी रैंकिंग देता है। जिस वेबसाइट की स्पीड जो है, फास्ट है जो वेबसाइट जल्दी ओपन होती है। अब आपको अपनी वेबसाइट को कैसे फास्ट रखना है। इसके लिए आप जब भी अपने कंटेंट में या फिर अपनी वेबसाइट में इमेज

का इस्तेमाल करोगे तो उन इमेज को उनका साइज़ कम करके ही इस्तेमाल करना है। उनको कंप्रेस करके ही इस्तेमाल करना है और इसके साथ-साथ अगर आपकी वेबसाइट WordPress के ऊपर बनी हुई है तो आपको फालतू के प्लगिंस का इस्तेमाल नहीं करना है। अगर आपकी वेबसाइट के अंदर कोई फालतू के प्लगिंस है तो आपको हटा देना है।

मैं अपनी वेबसाइट की स्पीड टेस्ट करता हूँ और आपको दिखाता हूँ कि मेरी वेबसाइट कितनी तेज़ है। वेबसाइट की स्पीड टेस्ट करने के लिए मैं जिस टूल का इस्तेमाल करने जा रहा हूँ उसका नाम “pagespeed.web.dev” है। मैं इस टूल की मदद से अपनी वेबसाइट की स्पीड चेक कर रहा हूँ और आपको दिखा रहा हूँ।

Google Ranking factors

तो मैंने अपनी वेबसाइट की स्पीड टेस्ट की है, अब आप देख सकते हैं कि मोबाइल पर मेरी वेबसाइट का स्कोर 87% है जो एक अच्छा स्कोर माना जाता है और इस टूल ने डेस्कटॉप पर मेरी वेबसाइट को 98% स्कोर दिया है जो एक अच्छा स्कोर माना जाता है, तो इसी तरह आपको भी अपनी वेबसाइट टेस्ट करनी है, अगर आपकी वेबसाइट का स्कोर 60% से कम है तो ऐसी सिचुएशन में

आपको अपनी वेबसाइट की स्पीड ठीक करने पर काम करना चाहिए, अगर आपकी वेबसाइट की स्पीड स्लो है तो यह टूल आपको उसका कारण भी बताता है, नीचे आपको उन सभी प्रॉब्लम को ठीक करना है, जैसे ही आप प्रॉब्लम ठीक कर लेंगे आपकी वेबसाइट की स्पीड फास्ट हो जाएगी।

Mobile Friendly Website

आज के टाइम में बहुत सारे यूजर्स जो है वह मोबाइल से ही आपकी वेबसाइट पर आते हैं तो इस कंडीशन में आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आपकी जो वेबसाइट है वह हमेशा मोबाइल फ्रेंडली ही होनी चाहिए। मतलब मोबाइल के ऊपर आपकी वेबसाइट सही से देखनी चाहिए। मोबाइल के ऊपर आपकी वेबसाइट पर जो टैक्स है, वह सही से दिखना चाहिए। इमेज सही से

देखनी चाहिए। बटन सही से काम करने चाहिए। लिंक सही से काम करना चाहिए क्योंकि गूगल भी ऐसी वेबसाइट कोई अच्छा मानता है जो वेबसाइट मोबाइल रेस्पॉन्सिव होती है और ऐसी वेबसाइट को ही रैंकिंग मिलती है जो वेबसाइट मोबाइल Frienldy होती हैं ऐसी वेबसाइट को गूगल रैंकिंग बहुत ही कम देता है। जो मोबाइल रेस्पोंसिव नही होती हैं

मैं आपकी वेबसाइट टेस्ट करके आपको दिखाता हूँ कि मेरी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली है या नहीं। इस टेस्ट के लिए मैं यह टूल “pagespeed.web.dev” इस्तेमाल कर रहा हूँ। यह टूल आपको बताएगा कि मेरी वेबसाइट कितनी मोबाइल फ्रेंडली है।

mobile friendly test

तो यहाँ आप देख सकते हैं कि मेरी वेबसाइट कितनी मोबाइल-फ्रेंडली है, इसके लिए मुझे कितना स्कोर मिला। मुझे 79 का स्कोर मिला, जो एक अच्छा स्कोर है। असल में, यह स्कोर और ज़्यादा होना चाहिए था, लेकिन इस टूल ने मुझे अपनी वेबसाइट में कुछ प्रॉब्लम दिखाई हैं जिन्हें मुझे देखना होगा। इस टूल ने मुझे बताया है कि मैंने अपनी वेबसाइट में कुछ हैवी इमेज इस्तेमाल की हैं, और इसीलिए यह स्कोर इतना है। अगर मैं इमेज का साइज़ ठीक करूँ, तो यह स्कोर बढ़ जाएगा, यह आसानी से 85 से 90 तक जा सकता है।

User Experience (UX)

यूजर एक्सपीरियंस भी एक बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट Google Ranking factors है।अगर आपकी वेबसाइट का यूजर एक्सपीरियंस अच्छा है। मतलब कोई व्यक्ति अगर आपकी वेबसाइट पर आता है। वह आपकी वेबसाइट पर रुकता है। कंटेंट पड़ता है। आपकी वेबसाइट को स्क्रोल करता है। दूसरे कंटेंट पड़ता है, कुछ सर्च करता है और आपकी वेबसाइट का जो नेविगेशन है, वह क्लियर है। सब चीज ठीक है तो ऐसी स्थिति में गूगल यह सब चीज नोट करता है। अपने पास अपने Data में।

तो इससे यह होता है कि जिस भी वेबसाइट का यूजर एक्सपीरियंस अच्छा है, मतलब जिस वेबसाइट के ऊपर यूजर्स जाते हैं और ज्यादा देर तक रुकते हैं। कंटेंट पढ़ते हैं। कंटेंट अच्छा होता है। नेविगेशन अच्छा है। डिजाइन अच्छा है तो इससे गूगल ऐसी वेबसाइट को धीरे-धीरे जो है, रैंकिंग में ऊपर लाता है।

Keyword Intent

यह Google Ranking के बहुत ज़रूरी फैक्टर्स में से एक है। आप जिस भी टॉपिक पर कंटेंट बना रहे हैं, क्या आपका कंटेंट उसी चीज़ का जवाब दे रहा है जो यूज़र सर्च करता है? क्या आपके कंटेंट का इंटेंट यूज़र की सर्च से मैच करता है? अगर आपका जवाब

है, तो ऐसा कंटेंट भी रैंक करेगा क्योंकि Google ऐसे कंटेंट को रैंक करता है जो यूज़र के कीवर्ड इंटेंट से मैच करता है। इसमें आपको एक बात का ध्यान रखना है कि अगर आपकी नई वेबसाइट है, तो आपको अपनी वेबसाइट पर लॉन्ग टर्म कीवर्ड्स पर काम करना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपकी वेबसाइट को जल्दी रैंकिंग मिलती है।

Reliable information systems

इसका मतलब है कि आप अपने यूज़र्स को जो जानकारी दे रहा है वह कितनी सही है, यानी जिस टॉपिक पर आप कंटेंट बना रहे हैं, उसके बारे में आपको कितना पता है, क्या आपको उस टॉपिक के बारे में पता भी है, आप सही जानकारी दे रहे हैं या नहीं, गूगल यह भी देखता है कि आप जो जानकारी दे रहा है वह कितनी सही है, जब गूगल को भरोसा हो जाता है कि आप जो जानकारी दे रहे हैं वह सही जानकारी है और फेक नहीं है, तो गूगल उस कंटेंट को रैंकिंग में लाता है।

Multiple Niches

मैं आपको बता दूँ कि यह Google Ranking के ज़रूरी फैक्टर्स में से एक है। जो वेबसाइट्स कई niches में काम करती हैं, ऐसी वेबसाइट्स को रैंकिंग में दिक्कत आती है क्योंकि Google ऐसी वेबसाइट्स पर आसानी से भरोसा नहीं करता। जो वेबसाइट्स कई niches में काम करती हैं, Google ऐसी वेबसाइट्स पर भरोसा करता है जो सिर्फ़ एक niche में काम करती हैं और जो वेबसाइट्स

एक niche में काम करती हैं, उन्हें जल्दी रैंकिंग मिलती है, जैसे हमारी वेबसाइट। हमारी वेबसाइट पर आपको “SEO” के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलती है, इसलिए हमारी वेबसाइट को मल्टी-niche में नहीं माना जाएगा, इसलिए आपको यह बात भी ध्यान में रखनी होगी। आपको एक ही टॉपिक पर लंबे समय तक ध्यान से काम करना होगा। तभी आपको जल्दी रैंकिंग मिलेगी।

Domain Authority

यह जो फैक्टर है यह एक इंपॉर्टेंट Google Ranking factors में माना जाता है। अगर आपकी वेबसाइट की डोमेन अथॉरिटी बहुत अच्छी है तो आपकी वेबसाइट का जो कंटेंट है, वह भी रैंक करेगा और आपकी वेबसाइट भी रैंक करेगी क्योंकि गूगल ऐसी वेबसाइट को Rank करता है। जिस वेबसाइट की डोमेन अथॉरिटी अच्छी होती है। अब डोमेन अथॉरिटी अच्छी कैसे होगी। इसके लिए आपको अपनी वेबसाइट के ऊपर हाई क्वालिटी के बैकलिंक्स बनाने हैं।

जब आपकी वेबसाइट के ऊपर हाई क्वालिटी के बैकलिंक्स होते हैं तो इससे जो है आपकी वेबसाइट की अथॉरिटी धीरे-धीरे बढ़ती है और इसके साथ-साथ ही आपको Daily कंटेंट भी लिखना है। ऐसा नहीं करना है कि एक हफ्ते में सिर्फ एक ही बारी कंटेंट लिख रहे हो, ऐसा नहीं करना है। डेली कंटेंट लिखना है। यह चीज गूगल समझता है और डेली कंटेंट लिखने के साथ-साथ आपको अपने कंटेंट को अपडेट भी करना है।

अगर आप ऐसा करते हैं, रोज़ाना कंटेंट लिखते हैं और अपनी वेबसाइट के लिए हाई क्वालिटी बैकलिंक्स बनाते हैं, तो आपकी वेबसाइट की अथॉरिटी धीरे-धीरे बढ़ने लगती है।

Spammy Activity

अगर आप अपनी वेबसाइट पर कोई स्पैमी एक्टिविटी करते हैं या किसी गलत तरीके से अपनी वेबसाइट को रैंक करने की कोशिश करते हैं जैसे कोई ब्लैक हैट टेक्नीक इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसी सिचुएशन में गूगल आपकी वेबसाइट को पेनल्टी दे सकता है और आपकी वेबसाइट को गूगल सर्च से हटा भी सकता है, इसलिए आपको कोई भी गैर-कानूनी एक्टिविटी नहीं करनी चाहिए, अपनी वेबसाइट को रैंक कराने के लिए आपको जो भी काम करना है, वह आपको नेचुरल तरीके से ही करना है।

On Page SEO

जब आप अपना पूरा कंटेंट लिख लें, तो उसके बाद आपको अपने कंटेंट का On-Page-SEO भी करना होगा। ऐसा करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि आप जितना ध्यान से कंटेंट का On-Page-SEO करेंगे, उतना ही आपका कंटेंट सर्च इंजन फ्रेंडली बनेगा और गूगल आपके कंटेंट को अच्छे से समझ पाएगा और आपके कंटेंट को सही कीवर्ड पर रैंक भी कर पाएगा। इसलिए जब भी आप

कंटेंट लिखें, तो अपने कंटेंट का On-Page-SEO ज़रूर करें। इसमें आपको कुछ काम करने होते हैं जैसे SEO फ्रेंडली टाइटल देना और डिस्क्रिप्शन लिखना, कंटेंट में इमेज डालना, इमेज का SEO करना और इसके साथ ही कंटेंट में इंटरनल लिंकिंग करना, ये सभी वो काम हैं जो आपको करने होते हैं। इसमें और भी चीज़ें हैं जो मैं आ रहा हूँ।

Off Page SEO

यह भी बहुत ज़रूरी Google Ranking factors के अंदर आता है, आपको अपनी वेबसाइट का Off Page SEO भी करना होता है, इससे भी आपकी वेबसाइट की रैंकिंग बेहतर होती है, इसमें आपको अपनी वेबसाइट के लिए हाई क्वालिटी बैकलिंक्स बनाने होते हैं और इसके साथ ही आपको अपनी वेबसाइट को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमोट भी करना होता है, आपको अपनी वेबसाइट को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्टिव रखना होता है, अगर आप यह काम करते हैं तो आपकी वेबसाइट को इससे बहुत फ़ायदा होगा।

Technical SEO

जब आप अपनी वेबसाइट पर काम करते हैं, तो धीरे-धीरे एक समय ऐसा आता है जब आपकी वेबसाइट पर कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम आ सकती है, इसलिए आपको अपनी वेबसाइट में उन सभी टेक्निकल प्रॉब्लम को ठीक करना होगा, ये प्रॉब्लम उसमें दिखाई देती हैं जैसे वेबसाइट स्पीड, वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडलीनेस, लाइट इमेज, आपको इन सब पर ध्यान देना होगा, आपको इन सबको ठीक करना होगा, आपकी वेबसाइट पर और भी चीजें हैं, आपको उन सबका ध्यान रखना होगा।

सही प्लेटफार्म पर काम करना

यह एक ज़रूरी बात है कि आप किस प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं, यानी आपकी वेबसाइट किस प्लेटफॉर्म पर बनी है, अगर आपकी वेबसाइट ऐसे प्लेटफॉर्म पर बनी है जो फ्री प्लेटफॉर्म है, जैसे ब्लॉगर‘ तो ऐसे में आपकी वेबसाइट को जल्दी रैंकिंग नहीं मिलती है और इसके साथ ही, अगर आपकी वेबसाइट ऐसे प्लेटफॉर्म पर है जिसमें आपको पैसे देने पड़ते हैं, तो ऐसे प्लेटफॉर्म पर जैसे ‘वर्डपेस’ ऐसे प्लेटफार्म पर आपकी वेबसाइट को जल्दी रैंकिंग मिल सकती हैं, इसलिए रैंकिंग के लिए प्लेटफॉर्म भी मायने रखता है।

Fresh Content (Content Freshness)

यह भी एक रैंकिंग फैक्टर का इंर्पोटेंट पार्ट ही है। इसमें क्या होता है कि मान लीजिए। आपकी वेबसाइट के ऊपर एक कंटेंट लिखा हुआ है, लेकिन उसमें जानकारी बहुत ज्यादा पुरानी हो गई है। अब किसी यूज़र को कुछ नई जानकारी चाहिए। कुछ नहीं अपडेट आई है, लेकिन आपने उस कंटेंट को अपडेट नहीं किया है, लेकिन किसी दूसरी वेबसाइट ने उस कंटेंट को अपडेट किया है। नई इनफार्मेशन अपने कंटेंट में डाली है तो ऐसी स्थिति में गूगल उस वेबसाइट के कंटेंट को रैंक करेगा। जिस वेबसाइट ने नई

इनफार्मेशन अपने कंटेंट में ऐड की है। आपके कंटेंट को रैंक नहीं करेगा। क्योंकि आपने अपने कंटेंट को अपडेट नहीं किया है। समय के साथ-साथ तो इसमें आपको इस बात का ध्यान रखना है। समय के साथ-साथ अगर आपके कंटेंट में कुछ चेंज आते हैं। मतलब कोई अपडेट आती है तो वह आपको अपने कंटेंट में अपडेट करके ही रखना है। इससे आपके कंटेंट की रैंकिंग बनी रहेगी।

Internal Linking

इसमें आपको यह करना होता है कि इसमें आपको अपने एक आर्टिकल को अपने दूसरे आर्टिकल से जोड़ना होता है। इंटरनल लिंकिंग करनी होती है। अगर आप अच्छे तरीके से अपनी वेबसाइट के अंदर इंटरनल लिंकिंग करते हो तो इससे आपको काफी फायदे होते हैं। इससे आपकी जो वेबसाइट का बाउंस रेट है, वह भी अच्छा रहता है और इससे गूगल आपके कंटेंट को जल्दी भी इंडेक्स कर पता है।

Secure Website (HTTPS)

जब आप किसी भी वेबसाइट पर जाते हैं, तो वहां जाने के बाद आपको यह भी देखना होता है कि वह वेबसाइट कितनी सिक्योर है और कितने लोग उस वेबसाइट पर भरोसा करते हैं। ऐसे में अगर आपकी वेबसाइट HTTP है, तो इससे पता चलता है कि आपकी वेबसाइट एक ट्रस्टेड वेबसाइट नहीं है और लोग आपकी वेबसाइट पर भरोसा नहीं करते हैं। इसलिए, आपको अपनी वेबसाइट को हमेशा HTTPS में रखना चाहिए। इससे Google और यूज़र दोनों की नज़र में आपकी वेबसाइट पर भरोसा बनता है।

Click Through Rate (CTR)

CTR का मतलब होता है Click Through Rate। इसका मतलब यह होता है कि जब आपका कंटेंट गूगल के अंदर रैंक करता है तो आपके कंटेंट के ऊपर कितने लोग क्लिक करते हैं जितने ज्यादा लोग आपके कंटेंट के ऊपर क्लिक करेंगे। उतना ही ज्यादा आपका CTR होगा और जितना ज्यादा आपका CTR होगा तो इससे गूगल को एक पॉजिटिव सिग्नल मिलता है कि हां, यह कंटेंट

अच्छा है। इस कंटेंट के अंदर सही इनफॉरमेशन दी गई है। अब आपको CTR को कैसे बढ़ाना हैं। आपको जो टाइटल लिखना है अपने कंटेंट का वो एक ऐसा टाइटल लिखना है जिसको देखने के बाद किसी भी व्यक्ति को उसे पर क्लिक करने का मन करे और इसके साथ-साथ आपको अपने कंटेंट का डिस्क्रिप्शन भी अच्छे से लिखना है डिस्क्रिप्शन ऐसा होना चाहिए जिसको देखने के बाद लोगो को आपका कंटेंट पड़ने का मन करे इन सब काम को करने से CTR अच्छा होता हैं

Dwell Time

ड्यूल टाइम इसका मतलब यह होता है कि अगर कोई यूजर गूगल से आपकी वेबसाइट पर आता है तो वह यूजर आपकी वेबसाइट पर आने के बाद कितनी देर तक आपकी वेबसाइट पर रोक रहा है। अगर आपकी वेबसाइट पर ज्यादा देर तक गूगल से आने के बाद कोई व्यक्ति रोक रहा है तो इसका जो पॉजिटिव सिग्नल गूगल को मिल जाता है और अगर कोई व्यक्ति आपकी वेबसाइट पर

आता है। Google से और आते ही चला जाता है तो इसका एक नेगेटिव सिग्नल गूगल को मिलता है और यह सब चीज गूगल रिकॉर्ड करता रहता है। अपने पास और इसके साथ-साथ ही आपको मैंने बाता ही दिया है कि कैसे आपको अपनी वेबसाइट का इंटरफेस अच्छा करना है। इससे क्या होगा कि कोई भी यूजर आपकी वेबसाइट पर आएगा तो ज्यादा देर तक रुकेगा और आपको कंटेंट पर भी ध्यान देना है। कंटेंट अच्छा बनाना है। कंटेंट ही सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट में से एक है।

Content Length

यह भी एक Google Ranking factors में से एक इंपॉर्टेंट फेक्टर माना जाता है। आपने बहुत बार देखा होगा कि कुछ वेबसाइट के ऊपर छोटे कंटेंट लिखे होते हैं, लेकिन वह भी रैंक करते हैं, लेकिन वह ऐसे कंटेंट होते हैं जो ज्यादा समय तक रैंक नहीं करते हैं। गूगल हमेशा ऐसे कंटेंट को रैंक करता है जो कंटेंट लंबे कंटेंट होते हैं। जिन कंटेंट के अंदर टॉपिक को डिटेल में समझाया जाता है

तो आपको इस चीज का ध्यान रखना है कि जब आप कंटेंट लिखोगे जिस भी टॉपिक के ऊपर आप कंटेंट लिख रहे हो। ऐसा कंटेंट लिखना है कि उस कंटेंट के अंदर आपको उस टॉपिक से रिलेटेड जो आप समझाने वाले हो। हर चीज आपको बता देनी है। मतलब यूजर को किसी और वेबसाइट के ऊपर जाने की जरूरत ना पड़े। उस टॉपिक से रिलेटेड जिस टॉपिक पर आप कंटेंट लिख रहे हो। अगर एक बारी आपकी वेबसाइट पर यूजर आ जाये। आपके कंटेंट को यूजर एक बार पढ़ने लग जाए तो आपके कंटेंट में ही यूजर को हर चीज मिल जानी चाहिए।

Image Optimization

जब आप अपने कंटेंट के अंदर इमेज अपलोड करते हो तो इमेज को अपलोड करने से पहले आपको उस इमेज का सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन करना होता है। मतलब उस इमेज का जो साइज है, उसको कम करना होता है और इसके साथ-साथ ही आपको उस इमेज में Alt tag भी देना होता है ताकि गूगल को यह समझ में आ सके कि वह इमेज किस बारे में है। बहुत बार ऐसा भी होता है की इमेज की वजह से ही आपकी वेबसाइट Rank कर जाती है। आपका कंटेंट भी रैंक कर जाता है तो इमेज को अच्छे से ऑप्टिमाइज़ करना जरुरी होता हैं

Social Signals

यह जो रैंकिंग फैक्टर है ये एक डायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर नहीं है, लेकिन एक इनडायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर जरूर है। आपको क्या करना है जब भी आप अपनी वेबसाइट पर कंटेंट बनाते हो तो कंटेंट को पब्लिश करने के बाद उस कंटेंट को आपको सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर भी करना है। इससे यह होता है कि Google को यह चीज पता चलती है कि आप अपने कंटेंट को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हो और आपको सोशल मीडिया से भी ट्रैफिक मिलता है तो यह एक पॉजिटिव सिग्नल होता है Google के लिए।

Google Ranking Factors FAQ

Question:1 What are the most Important Google Ranking Factors?

Answer: वैसे तो मैंने आपको जो रैंकिंग फैक्टर्स बताए हैं, वे सभी ज़रूरी रैंकिंग फैक्टर्स हैं, लेकिन अगर आप सबसे ज़रूरी रैंकिंग फैक्टर्स के बारे में जानना चाहते हैं, तो वे हैं वेबसाइट की अथॉरिटी ज़्यादा होनी चाहिए, वेबसाइट में बेस्ट क्वालिटी कंटेंट होना चाहिए, वेबसाइट में हाई क्वालिटी बैकलिंक्स होने चाहिए, ये थोड़े ज़्यादा ज़रूरी रैंकिंग फैक्टर्स में आते हैं, बाकी जो मैंने आपको बताए हैं, वे भी ज़रूरी हैं, आप उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते।

Question:2 Is Social Media a Google ranking factor?

Answer: नहीं, सोशल मीडिया कोई डायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर नहीं है लेकिन यह ज़रूर एक इनडायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर है क्योंकि आपकी वेबसाइट को सोशल मीडिया से बैकलिंक्स मिलते हैं और आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक भी आता है और आपके ब्रांड के बारे में लोगों में अवेयरनेस बढ़ती है इसलिए यह डायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर नहीं है लेकिन इसे इनडायरेक्ट रैंकिंग फैक्टर कहा जा सकता है।

Question:3 Best practices for mobile-first indexing compliance?

Answer: इसका मतलब है कि आपकी वेबसाइट मोबाइल पर भी अच्छी दिखनी चाहिए। मतलब, अगर कोई यूज़र मोबाइल से आपकी वेबसाइट पर आता है, तो आपकी वेबसाइट मोबाइल पर अच्छी दिखनी चाहिए। यूज़र के लिए टेक्स्ट पढ़ना आसान होना चाहिए। इमेज यूज़र को ठीक से दिखनी चाहिए और इसके साथ ही, अगर वेबसाइट पर कोई लिंक हैं, तो वे लिंक मोबाइल पर ठीक

से काम करने चाहिए। आपकी पूरी वेबसाइट मोबाइल रिस्पॉन्सिव होनी चाहिए। अगर आपकी पूरी वेबसाइट मोबाइल रिस्पॉन्सिव है, तो Google आपकी वेबसाइट को पहले इंडेक्स करेगा। Google उन वेबसाइट को बाद में इंडेक्स करेगा जो मोबाइल फ्रेंडली नहीं हैं।

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